70 वर्षों के बाद भी आरक्षण

संविधान के प्रभाव में आने के समय आरक्षण व्यवस्था को मात्र 10 वर्षों के लिए लागू किया गया था | विदित हैं कि आरक्षण को इसलिए लागू किया गया था, जिससे कि समाज के कमजोर तथा वंचित वर्गों को समानता तथा बराबरी का अवसर उपलब्ध हों सके |   प्रारम्भ में आरक्षण केवल अनुसूचित जाति…

भारत की आरक्षण व्यवस्था

भारत की जाति व्यवस्था हिन्दू धर्म की वर्ण व्यवस्था का ही एक रूप हैं | प्राचीन काल से ही समाज का वर्गीकरण पेशेवर आधार पर किया जाता रहा हैं |   ऐसे में ब्राम्हण वर्ण समाज के सर्वोच्य स्तर पर माना जाता रहा हैं, तथा शूद्र वर्ण निम्नतम स्तर पर | इसके अतिरिक्त भी पांचजन्य…

मौलिक अधिकारों का अतिक्रमण

नागरिकों को मौलिक अधिकारों का निश्चित आश्वासन किसी भी लोकतान्त्रिक व्यवस्था का आधार – स्तम्भ हैं |   भारत के “सम्प्रभु, समाजवादी, धर्म निरपेक्ष तथा लोकतान्त्रिक गणराज्य “ के चरित्र के आधार है वह मौलिक अधिकार, जिन्हें कि भारत संविधान आश्वस्त करता हैं |   परन्तु भारत में विभिन्न तर्कों के आधार पर समाज के…

सोशल जस्टिस और नेचुरल जस्टिस

भारत के संविधान में सोशल जस्टिस तथा नेचुरल जस्टिस दोनों ही शब्द नहीं आते हैं, परन्तु संविधान की प्रस्तावना अर्थात Preamble नेचुरल जस्टिस के सिद्धान्त को प्रतिपादित करता हैं |   अपितु प्रस्तावना के माध्यम से संविधान सामाजिक आर्थिक तथा राजनैतिक न्याय का आश्वासन समस्त नागरिकों को प्रदान करता हैं |   जहाँ एक ओर…

आरक्षण और कुशलता

क्या आरक्षण व्यवस्था दक्षता और कुशलता बढानें के विपरीत अकुशलता (Inefficiency) को बढ़ावा नहीं दे रही हैं ?       शायद यह भारत वर्ष की सर्वथा अनिर्णित बहस हैं | जबकि सभी मानते हैं कि समाज के कमजोर वर्गों का सर्वागीण विकास अति महत्वपूर्ण हैं, फिर भी आरक्षण जैसे उपाय से सब ओर समस्याए ही पैदा…

क्या आरक्षण न्यायोचित हैं ?

क्या भारत की आरक्षण व्यवस्था न्यायोजित हैं – अर्थात क्या यह न्याय – व्यवस्था के मूलभूत सिद्धांतों के अनुकूल हैं ?   आरक्षण समाज में सभी को बराबरी का अवसर देने की दृष्टी से लागू किया गया था | परन्तु 70 वर्षों का अनुभव बताता है कि गरीबी ओर असमानता में तो कोई विशेष फर्क…

अनोखा न्याय

जबकि यह सर्वमान्य हैं कि समाज के कमजोर वर्गों के लिए अतिरिक्त कदम उठाना सरकार के लिए वांछनीय हैं, फिर भी आरक्षण के माध्यम से ऐसा हों, यह हास्यास्पद लगता हैं |   फिर भी 70 वर्षों की आरक्षण व्यवस्था के माध्यम से कमजोर वर्गों के उत्थान का प्रयोग मोटे तौर पर असफल ही कहा…