28 January 2017

 

27 जनवरी 2017 को जयपुर में हुई एक घटना में करणी सेना नामक एक राजपूत सामाजिक संगठन के कुछ कार्यकर्ताओं द्वारा फिल्म निर्माता संजय लीला भंसाली की पिटाई की गई |

सच्चाई यह हैं कि करणी सेना के कुछ युवा कार्यकर्ता जयगढ़ किले पर चल रही फिल्म शूटिंग के सेट पर कुछ अपमानजनक दृश्यों को लेकर, भंसाली से चर्चा हेतु शांतिपूर्वक वार्ता हेतु गए थे | परन्तु फिल्म सेट पर तैनात सिक्योरिटी गार्ड द्वारा बेवजह तीन फायर किये गए, जिससे कि युवा राजपूत कार्यकर्ताओं में रोष व्याप्त हों गया तथा दोनों पक्षों के बीच हाथापाई हों गई |

ध्यान देने की बात यह हैं कि एक निहायत ही स्वार्थी, व्यावसायिक लोलुपता से पूर्ण तथा दर्शकों को लुभाने वाली सस्ते हथकंडे को अपनाते  हुए संजय लीला भंसाली द्वारा रानी पदमिनी को बेहद अपमानजनक तरीके से प्रस्तुत किए जाने की योजना थी |

सभी को याद दिलाने की आवश्यकता हैं कि चितौड़ की रानी पदमिनी भारत के 125 करोड़ लोगों की प्रेरणा की स्रोत हैं | वर्ष 1303 में रावल रतन सिंह के शासन काल में अलाउद्दीन खिलजी द्वारा चितौड़ पर आक्रमण किया गया था |

आपूर्ति समाप्त होने पर राजपूत योद्धा केसरिया साफा बांध कर अंतिम बलिदान हेतु किले के द्वार खोल कर निकल पड़े, तथा रानी पदमिनी ने लगभग 17,000 राजपूत स्त्रियों के साथ जौहर की अग्नि में अपने को समर्पित कर दिया था | इस घटना को राजपूतों द्वारा ही नहीं अपितु सम्पूर्ण विश्व समाज द्वारा मानव इतिहास की एक स्वर्णीम घटना के रूप में याद किया जाता हैं |

परन्तु इस रोमहर्षक घटना के विषय में बन रही फिल्म में संजय लीला भंसाली एक लव सीन के माध्यम से रानी पदमिनी और खिलजी के बीच प्रणय – प्रसंग दर्शाने की बात कर रहे हैं |

यह विचार नितान्त हों घृणित, निंन्दनीय तथा अपमान जनक हैं, तथा इसके लिए भंसाली की जितनी मतर्सना की जाए, वो कम हैं |

राष्ट्रीय समता विचार मंच संजय लीला भंसाली, तथा उसका समर्थन करने वाले बॉलीवुड की उन समस्त हस्तियों की घोर निन्दा तथा मत्सर्ना करता हैं |

 

समीर सिंह चंदेल

अध्यक्ष

 

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